}(document, "script")); सनोज मिश्रा को मिला सीमा हैदर के अधिवक्ता डॉ. ए पी सिंह का समर्थन: तिहाड़ जेल से हाई कोर्ट तक का सफर

सनोज मिश्रा को मिला सीमा हैदर के अधिवक्ता डॉ. ए पी सिंह का समर्थन: तिहाड़ जेल से हाई कोर्ट तक का सफर


कवरेज इंडिया न्यूज़ ब्यूरो 

नई दिल्ली। पाकिस्तानी महिला सीमा हैदर के समर्थक और चर्चित अधिवक्ता डॉ. ए पी सिंह ने अब बॉलीवुड फिल्म निर्देशक सनोज मिश्रा का समर्थन करने का ऐलान किया है। यह खबर तब सुर्खियों में आई, जब सनोज मिश्रा को दिल्ली की तिहाड़ जेल में रखा गया है और उनके मामले की सुनवाई कल यानी 5 अप्रैल 2025 को हाई कोर्ट में होने वाली है। डॉ. ए पी सिंह का यह कदम न केवल कानूनी गलियारों में चर्चा का विषय बन गया है, बल्कि सनोज के विवादास्पद करियर को भी नई दिशा दे सकता है।

विवादों में सनोज मिश्रा: महाकुंभ गर्ल और बलात्कार का आरोप

सनोज मिश्रा हाल ही में उस वक्त विवादों के घेरे में आए, जब उन्होंने अपनी आगामी फिल्म "द डायरी ऑफ मणिपुर" के लिए महाकुंभ गर्ल के नाम से मशहूर मोनालिसा को ऑफर दिया। यह फिल्म पहले ही अपनी संवेदनशील विषयवस्तु के कारण चर्चा में थी। लेकिन मामला तब और गंभीर हो गया, जब सनोज पर एक 28 वर्षीय अभिनेत्री ने बलात्कार का आरोप लगाया। इसके बाद 31 मार्च 2025 को गाजियाबाद पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया, और अब वह तिहाड़ जेल में बंद हैं। इस घटनाक्रम ने बॉलीवुड और कानूनी हलकों में हलचल मचा दी है।

डॉ. ए पी सिंह का समर्थन: क्या बदलेगा खेल?

डॉ. ए पी सिंह, जो पहले सीमा हैदर के मामले में अपनी मुखर वकालत के लिए सुर्खियों में रहे थे, अब सनोज मिश्रा के पक्ष में उतर आए हैं। उनका कहना है कि वह इस मामले की निष्पक्ष जांच और सनोज को न्याय दिलाने के लिए प्रयास करेंगे। यह समर्थन इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि सनोज का केस अब हाई कोर्ट में पहुंच चुका है, जहां उनकी जमानत या मामले की अगली दिशा तय होगी। जानकारों का मानना है कि डॉ. सिंह की कानूनी विशेषज्ञता और मीडिया में उनकी सक्रियता सनोज के लिए एक मजबूत आधार तैयार कर सकती है।

कौन हैं सनोज मिश्रा?

सनोज मिश्रा का जन्म 11 अगस्त 1977 को उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जिले के हैदरगढ़ में हुआ था। लखनऊ के शिया पीजी कॉलेज से समाजशास्त्र में मास्टर्स करने वाले सनोज ने अपने करियर की शुरुआत बतौर सहायक निर्देशक की। 2014 में उनकी पहली निर्देशित फिल्म "बीटाब" आई, जिसके बाद उन्होंने "गांधीगिरी", "राम की जन्मभूमि", "लफंगे नवाब", "काशी तो कश्मीर", "शशांक", "गजनवी" और "द डायरी ऑफ वेस्ट बंगाल" जैसी फिल्में बनाईं। उनकी फिल्में अक्सर सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों पर आधारित रही हैं, जो उन्हें प्रशंसा के साथ-साथ विवादों में भी लाती रही हैं।

आगे क्या?

सनोज मिश्रा का मामला अब न केवल कानूनी, बल्कि सामाजिक और सिनेमाई दृष्टिकोण से भी चर्चा का केंद्र बन गया है। हाई कोर्ट में होने वाली सुनवाई से यह साफ होगा कि उनका करियर और निजी जीवन इस संकट से उबर पाता है या नहीं। दूसरी ओर, डॉ. ए पी सिंह का समर्थन इस कहानी में एक नया मोड़ ला सकता है। क्या यह समर्थन सनोज के लिए राहत का सबब बनेगा या विवाद को और हवा देगा? इसका जवाब आने वाले दिनों में मिलेगा।


नोट: यह खबर आज, 4 अप्रैल 2025 की स्थिति पर आधारित है। आगे की सुनवाई और घटनाक्रम के आधार पर इसमें बदलाव संभव है।

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