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देश समाज के लिए घातक हैं उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य, पार्टी के ही पूर्व पदाधिकारी ने लगाए सनसनीखेज आरोप

कवरेज इण्डिया न्यूज़ डेस्क

प्रयागराज । प्रयागराज निवासी सामाजिक कार्यकर्ता एवं आरटीआई एक्टिविस्ट दिवाकर नाथ त्रिपाठी ने उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के शैक्षणिक प्रमाणपत्रों पर सवाल उठाया है । खास बात यह है कि केशव प्रसाद मौर्य के खिलाफ मामला उठाने वाले दिवाकर त्रिपाठी खुद भारतीय जनता पार्टी काशी क्षेत्र के क्षेत्रीय उपाध्यक्ष रह चुके हैं। श्री त्रिपाठी का कहना है की डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने निर्वाचन आयोग से लेकर इंडियन आयल कारपोरेशन का फिलिंग स्टेशन तक प्राप्त करने के लिए जिन शैक्षिक दस्तावेजों का इस्तेमाल किया है उनमें से कुछ फर्जी व कूटरचित है।

 

श्री त्रिपाठी का दावा है कि उन्होंने उनकी पुष्टि संबंधित विभागों से प्राप्त कर ली है, विगत 24 फरवरी को मुख्य न्यायाधीश उच्च न्यायालय इलाहाबाद के पास भेजे गए शिकायती पत्र में दिवाकर ने दस्तावेजों का उल्लेख करते हुए लिखा है कि उत्तर प्रदेश के डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने न सिर्फ निर्वाचन आयोग के साथ धोखाधड़ी की है बल्कि देश की जनता के साथ भी धोखा किया है जिसने विश्वास के साथ उन्हें वोट देकर डिप्टी सीएम की कुर्सी तक पहुंचाया है। दिवाकर त्रिपाठी का कहना है कि उन्होंने आरटीआई एक्ट की मदद से जुटाए गए शैक्षणिक प्रमाणपत्रों की पुष्टि के लिए हिंदी साहित्य सम्मेलन कार्यालय से संपर्क साधा।

 

अनुक्रमांक 3238, संवाद 2053 (1996) उत्तमा द्वितीय खंड ( साहित्य रत्न) के प्रपत्र ओं की जांच की तो पता चला कि उक्त अनुक्रमांक किसी मनदीप सिंह पुत्र लाल सिंह चौहान के नाम पर दर्ज हैं। डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य के संबंध में श्री त्रिपाठी का कहना है कि एक सर्वोच्च संवैधानिक पद पर बैठे हुए व्यक्ति द्वारा यदि इस तरह से कूट रचित दस्तावेजों के सहारे लाभ प्राप्त किया जाएगा तो निश्चित तौर पर यह आम जनमानस के लिए अत्यंत घातक होगा। एक डिप्टी सीएम के पद पर बैठे व्यक्ति यदि इस तरह की हरकत करता है और देश की संवैधानिक शक्तियां खामोश रहती है तो यह मान लेना चाहिए कि अव्यवस्था सिर चढ़कर बोल रही है।

 

दिवाकर त्रिपाठी ने मुख्य न्यायाधीश को लिखे पत्र में तथ्यों की जांच के आधार पर उचित कार्यवाही किए जाने की मांग की है, हालांकि समाचार लिखे जाने तक इस संबंध में किसी प्रकार की हलचल नजर नहीं आई थी लेकिन उम्मीद जताई जा रही है कि जिस प्रकार से आरटीआई एक्टिविस्ट ने डिप्टी सीएम के कथित जाली शैक्षिक प्रमाणपत्रों को लेकर चैलेंज किया है उसे देखकर तो उम्मीद लगाई जा सकती है कि आने वाले दिनों में न्यायपालिका की भूमिका बेहद अहम होगी।

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