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संकट की घड़ी परीक्षा, चुनाव, कोरोना, कहीं पड़ ना जाए रोना प्रवक्ता आशुतोष त्रिपाठी

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कवरेज इण्डिया न्यूज़ डेस्क

एक तरफ जिला पंचायत ग्राम पंचायत चुनाव दूसरी तरफ करोना और सरकार का दिशानिर्देश लेकिन प्रतिबंधों में ढील दिए जाने से मामलों में वृद्धि की उम्मीद नहीं थी लेकिन खासकर ऐसे वक़्त में जब टीकाकरण कार्यक्रम अभी भी प्रारंभिक चरण में है. दूसरी तरफ परीक्षा करोना का भयानक कहर संकट की इस विशाल घड़ी में कहीं नेताओं की रैलियां हो रही हैं कहीं पर छात्र अपनी परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं कहीं पर वैक्सीनेशन तेज कर दिया गया है दूसरी तरफ मौत का आंकड़ा भी बहुत जोर पकड़ रहा है और देश में एक बार फिर से करोना संक्रमण के लगातार बढ़ते मामले डराने लगते हैं वर्तमान समय की स्थिति बहुत ही गंभीर है क्योंकि एक तरफ परीक्षाओं का जोर है एक तरफ बेरोजगारी का कहर है एक तरफ नेताओं का आंदोलन है तो एक तरफ नेताओं का कहीं पर भीड़ जुटाने की रैलियां है सरकार दिशा निर्देश देती है 2 गज की दूरी मास्क है जरूरी।

 

वही नेतागण जब विशाल रैलियां करते हैं तो वहां पर कोरोना नहीं पाया जाता हालत इतनी भयावह होती जा रही है इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पिछले दो दिनों में डेढ़ लाख से अधिक संक्रमण के मामले पाए गए हैं और भारत इस समय शीर्ष स्थान पर है इस मामले में तो यह विडंबना यह है कि कुछ राज्यों में विधानसभा चुनाव जारी हैं जिसमें दिग्गज नेताओं की सभाओं में भीड़ बढ़ाने का लुभावना तरकस छोड़ा जा रहा है और ना ही शारीरिक दूरी का पालन और ना ही नेतागण कभी यह भी कह रहे हैं कि बार-बार हाथ धोने की सलाह पर नेतागण इन सब निर्देशों का नजर अंदाज कर भीड़ इकट्ठा कर रहे हैं उन्हें अपने उम्मीदवारों के पक्ष में वोट डालने के लिए प्रभावित कर रहे हैं क्या नेताओं पर दिशानिर्देश लागू नहीं होते इस संकट की घड़ी में और एक छात्र जीवन के उस दौर से गुजर रहा है जहां पर उसकी परीक्षा की घड़ियां है वर्तमान समय में जिला पंचायत ग्राम पंचायत का चुनाव क्या होगा हाल क्या होगी स्थिति यह कोई नहीं जानता बहुत भयानक हालत से भारत गुजर रहा है नेता न नतमस्तक होगा ना कोरोना झुकेगा अब देखना यह है कि हालत क्या होगा।

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