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बेरोजगारी की मार: कोरोना से मृत लोगों के कफन चुराकर बेचने वाले गिरफ्तार

कवरेज इण्डिया न्यूज़ डेस्क

बागपत। कोरोना काल में एक ओर जहां लोग संक्रमण से अपनी जान गवा रहे हैं, इसके इलाज मैं जमीन दुकान व गहने बेच रहे हैं. वहीं दूसरी ओर मध्यमवर्गीय परिवारों को घर चलाने में भी खासा दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है. इसका ताजा उदाहरण बागपत से देखने को मिल रहा है जहां पर पुलिस ने एक ऐसे गिरोह का पर्दाफाश किया है जो इस कोरोना काल मे संक्रमित मरीजों की लाशों से कफन चोरी किया करते थे. ठीक सुना आपने, जिन संक्रमित मरीजों की लाशों को उनके रिश्तेदार भी छूना पसंद नहीं करते उन्हीं की लाशों से कफन चुराया करता था यह गिरोह.

 

पुलिस ने बताया कि कफन चुराने के बाद में उन्हें नया कर बाजार में दुकानों पर बेच दिया जाता था. आरोपियों में एक कपड़ा व्यापारी भी है जो इस घिनौने धंधे का सरगना है. पुलिस ने सात बदमाशों को गिरफ्तार कर उनके पास से भारी संख्या में चद्दर, कुर्तें, कमीज, धोती, शॉल आदि सामान बरामद किया है.

 

पुलिस ने मामले का खुलासा करते हुए बताया कि आरोपी रात के समय श्मशान घाट से कफन और दूसरे कपड़े चोरी कर ले आते थे. उसके बाद उन कपड़ों की धुलाई कर उन पर ग्वालियर कंपनी के स्टीकर लगा देते थे. कपड़े एकदम नया दिखे, इसलिए रिबन और स्टीकर लगाकर पैकिंग कर देते थे. उसके बाद कफन और दूसरे कपड़े बाजार में बेच देते थे. श्मशान घाट आजकल कोरोना पॉजिटिव लोगों के शवों से अटे पड़े हैं, इसलिए वहां पड़े कफन और दूसरे कपड़ों में संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है.

 

पुलिस की निगाह में यह लोग भले ही एक गिरोह चलाते हो, चोरी किए हैं तो अपराध की श्रेणी में भी आते हैं। लेकिन यह खबर मौजूदा हालात पर बहुत बड़ा सवाल भी छोड़ती है, जहां अपना पेट पालने के लिए लोगों को लाशों से कफन चुराने में भी कोई गुरेज नहीं महसूस होता। यही नहीं यह खबर मौजूदा हालातों पर बहुत बड़ा सवाल खड़ा करती है जहां पर लोगों को अपनी आजीविका चलाने के लिए, परिवार के लिए 2 जून की रोटी  की व्यवस्था करने के लिए मानवता को भी शर्मसार कर देना पड़ रहा है।

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