November 24, 2020

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विश्व रक्तदान दिवस विशेष: जनकल्याण की धुरी, रक्तदान जरूरी

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अंकित सिंह यादव, कवरेज इण्डिया प्रयागराज। 

दुनिया के इस सबसे बड़े लोकतंत्र में लोग रक्तदान से इतना संकोच करते है क्योंकि अभी तक यह मिथक टूट नही पा रहा है कि रक्तदान करने से लोग कमज़ोर हो जाते है और उस रक्त की भरपाई होने में महीनों लग जाते है। इतना ही नही यह गलतफहमी भी व्याप्त है कि नियमित रक्तदान से लोगो की रोग प्रतिकारक क्षमता कम होती है और उससे बीमारियां ज़ल्दी पकड़ लेती है। रक्तदान का नाम सुनते ही रिश्तेदार, बेटा, भाई-बहन इत्यादि भी दूर भाग जाता है या फिर बहाने बनाने लगते है। दरअसल समाज में रक्तदान को लेकर तमाम भ्रांति है उसको नज़रअंदाज करना चाहिए क्योंकि रक्तदान करने से किसी भी प्रकार की कोई कमजोरी या समस्या नहीं आती।

विश्व स्वास्थ्य संगठन के द्वारा 14 जून को विश्व रक्तदान दिवस मनाया जाता है, इसका उद्देश्य रक्तदान को बढ़ावा देना है। विश्व रक्तदान दिवस पहली बार साल 2004 में मनाया गया। इसदिन

शरीर विज्ञान में नोबल पुरस्कार प्राप्त प्रसिद्ध वैज्ञानिक कार्ल लैंडस्टाईन की याद में पूरे विश्व में यह दिवस मनाया जाता है। इस दिवस को मनाने का उद्देश्य रक्तदान को प्रोत्साहन देना एवं उससे जुड़ी भ्रांतियों को दूर करना है। 14 जून 1868 को ही महान वैज्ञानिक कार्ल लैंडस्टाईन का जन्‍म हुआ था, उन्होंने मानव रक्‍त में उपस्थित एग्‍ल्‍युटिनि‍न की मौजूदगी के आधार पर रक्‍तकणों का ए, बी और ओ समूह में वर्गीकरण किया। इस वर्गीकरण ने चिकित्‍सा विज्ञान में महत्‍वपूर्ण योगदान दिया। इस महत्‍वपूर्ण खोज के लिए ही कार्ल लैंडस्‍टाईन को सन 1930 में नोबल पुरस्कार दिया गया था।

 

प्रयागराज शहर के वरिष्ठ रंगकर्मी एवं समाजसेवी सैय्यद मोहम्मद मेहदी नक़वी ने वर्ष 1988 से रक्तदान करना आरम्भ किया। अब तक इन्होंने 114 बार रक्तदान किया है। इसके साथ ही 300 से ज़्यादा रक्तदान शिविरों का आयोजन कर लोगों को रक्तदान के प्रति जागरूक किया, साथ ही 5000 से भी ज़्यादा लोगों से रक्तदान करवाया। इस कार्य के लिए इनको देश ही नही विदेशों में भी विभिन्न सम्मान पत्रों से सम्मानित किया गया है।

श्री नक़वी कहते है कि यह सोचकर बहुत दुःख होता है कि आख़िर कोई रक्तदान क्यों नही करना चाहता। इसको लेकर लोगो को जगरूकता और रुचि दिखाना चाहिए साथ ही सरकार को भी इसके लिए और व्यापक स्तर पर जनजागरूकता अभियान चलाना चाहिए। और समाज के लोगो को बताना चाहिए कि आपके रक्त की एक बूंद भी किसी का जीवन बचा सकती है। युवाओं को इस कार्य से जुड़कर इसको बढ़ावा देना चाहिए। जिससे रक्त के बिना समाज में किसी की जान न जाये क्योंकि आपका रक्तदान किसी के जीवन को सुरक्षित कर सकता है।

समाजसेवी एवं पत्रकार मंगला प्रसाद तिवारी पिछले 5 वर्षो से रक्तदान करते आ रहे है। अब तक इन्होंने 10 बार रक्तदान किया है। श्री तिवारी ने बताया कि एक बार सोशल मीडिया पर वायरल एक मैसेज मुझे मिला जिसमें 5 वर्षीय बच्चा जो एक गंभीर बीमारी से पीड़ित था, उसके प्राणों की रक्षा हेतु तत्काल रक्त की आवश्यकता थी, समस्या यह थी कि उसके पिता शुगर पेशेंट होने की दशा में रक्त नहीं दे सकते थे और रिश्तेदार व भाईयों ने बहाना बना कर किनारा कर लिया था। इस घटना से मेरा मन उद्वेलित हो उठा मैंने बगैर उनके परिवार के बारे में जाने अपना रक्त देकर उस अनजान परिवार के बच्चे के प्राण बचाए। उसी दिन से रक्तदान करने का संकल्प ले लिया। मेरा प्रयास यह है कि मेरे द्वारा किए गए रक्तदान से यदि एक व्यक्ति भी प्रभावित होकर इस नेक कार्य में लग जाता है तो मेरा प्रयास सार्थक हो जाएगा। युवाओं को इस कार्य से जुड़कर इसको बढ़ावा देना चाहिए। जिससे रक्त के बिना समाज में किसी की जान न जाये क्योंकि आपका रक्तदान किसी के जीवन को सुरक्षित कर सकता है।

निजी बैंक के पूर्व प्रबन्धक अमित बनर्जी ने 1974 में 20 वर्ष की आयु से ही रक्तदान करने की शुरुआत किया। इन्होंने अब तक 86 बार स्वैस्च्छिक रक्तदान किया है। इसके लिए इनको देश ही नही बल्कि विदेशों में भी विभिन्न पुरस्कारों से सम्मानित व सेमिनारों में वक्त के रूप में आमंत्रित भी किया गया है। इन्होंने 1988 में एक संगठन स्वैस्च्छिक रक्त फोरम की स्थापना किया , जिसमें शहर के बहुत से प्रतिष्ठ लोगो के साथ ही युवा वर्ग भी खासा उत्साह के साथ जुड़ गये। वर्तमान में संस्था में लगभग 25000 रक्तदाता जुड़ चुके है।

श्री बनर्जी ने बताया कि इनकी संस्था को सरकार द्वारा किसी भी प्रकार का कोई अनुदान या मदद नही मिलती है । सभी स्वैच्छा के साथ ही इस कार्य को करते है। उन्होंने कहा कि युवाओं को रक्तदान के प्रति जागरूक होना चाहिए और रक्तदान करना चाहिए, उनके रक्तदान से किसी को नया जीवन मिल सकता है।

 

युवा समाजसेवी अजित सिंह पिछले चार वर्षों में 21 बार रक्तदान एवं 6 बार प्लेटलेट्स दान कर चुके है। इन्होंने 23 वर्ष की अल्पायु में 27 बार रक्तदान करने के साथ ही एक हेल्पर्स नामक संगठन का गठन किया जिसमें लोगो को रक्तदान के लिए जगरूक करने के लिए देश के विभिन्न राज्यों में शिविर आदि का आयोजन के साथ ही समाज के अन्य सामाजिक कार्यो को भी निरन्तर निःस्वार्थ संचालित करते है। वर्तमान समय तक सक्षम रक्तदाताओं के सहयोग से कई हज़ार लोगो का जीवन बचा चुके है। रक्तदान शिविरों में रक्तवीरो के साथ ही रक्तवीरांगनायें भी बढ़-चढ़ कर हिस्सा लेती हैं।

पुलिस मित्र परिवार से जुड़े राधे कृष्ण तिवारी ने कहा कि हमारे द्वारा किया गया रक्तदान कई ज़िन्दगियों को बचाता है। इस बात का अहसास हमें तब होता है जब हमारा कोई अपना खून के लिए जिंदगी और मौत के बीच जूझता है। उस वक्त हम नींद से जागते हैं और उसे बचाने के लिए खून के इंतजाम की जद्दोजहद करते हैं। रक्तदान कई बीमारियों को दूर भी भगा सकते हैं। भारत में हर साल 1 करोड़ ब्लड यूनिट की जरूरत पड़ती है। सोचिए, अगर कोई ब्लड ही डोनेट न करे तो फिर इस ब्लड की भरपाई कहां से होगी? इसलिए रक्तदान बहुत जरूरी है। दुर्घटना या बीमारी का शिकार हममें से कोई भी हो सकता है। आज हम सभी शिक्षि‍त व सभ्य समाज के नागरिक है, जो केवल अपनी नहीं बल्कि दूसरों की भलाई के लिए भी सोचते हैं तो क्यों नहीं हम रक्तदान के पुनीत कार्य में अपना सहयोग प्रदान करें और लोगों को जीवनदान दें।

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