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राममंदिर ट्रस्ट: एक और रजिस्ट्री की कीमत सामने आने से खुल गई पोल, संघ-सरकार नाराज, मंदिर के नाम पर हुई लूट!

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कवरेज इण्डिया न्यूज़ डेस्क

श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट राम मंदिर के लिए जमीन की खरीद फरोख्त में अपने ही कारनामों से घिरता जा रहा है। 18 मार्च 2021 को दो करोड़ की जमीन को 18.50 करोड़ रुपये में एग्रीमेंट कराने वाले ट्रस्ट ने उसी दिन लगभग इतनी ही भूमि की रजिस्ट्री मात्र आठ करोड़ में कराई थी। यह रिकॉर्ड सामने आने के बाद ट्रस्ट की ओर से कोई भी कुछ बोलने को तैयार नहीं है।

श्रीरामजन्मभूमि ट्रस्ट ने कुसुम पाठक व हरीश कुमार पाठक उर्फ बाबा हरिदास से गाटा संख्या 242/1, 242/2 में से रकबा 10370 वर्गमीटर की एक रजिस्ट्री 18 मार्च 2021 को आठ करोड़ में कराई है। इसमें भी गवाह के रूप में महापौर ऋषिकेश उपाध्याय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा का नाम दर्ज है। इस भूमि की लोकेशन मुख्य मार्ग से सटी हुई दिखाई गई है। इसके बारे में ट्रस्ट ने अब तक कोई जानकारी नहीं दी थी, जबकि इस भूखंड के पीछे बगैर सड़क मार्ग से जुड़े गाटा संख्या 243, 244 व 246 से 12080 वर्गमीटर भूमि श्रीरामजन्मभूमि ट्रस्ट ने 18.50 करोड़ में एग्रीमेंट कराया। इसी भूमि को महज दस मिनट पहले सुल्तान अंसारी और रवि मोहन तिवारी ने दो करोड़ में रजिस्ट्री कराई थी।

इस नए खुलासे के बाद विरोधियों को ट्रस्ट पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाने की नई संजीवनी मिल जाएगी। हालांकि ट्रस्ट इस मामले में किसी भी तरह की सफाई नहीं देना चाहता है, लेकिन संघ से लेकर सरकार तक यह मुद्दा सामने आने के बाद जिन जिम्मेदारों को भूमि की खरीद फरोख्त का कार्य सौंपा गया था, उनकी विश्वसनीयता पर सवाल उठ रहे हैं।

उठ रहे कई सवाल

सड़क किनारे की जमीन सस्ती, पीछे की जमीन महंगी कैसे
सवाल खड़ा होता है कि सड़क किनारे की भूमि सीधे भूस्वामी पाठक दंपती से लेने पर आठ करोड़ में मिल जाती है तो पीछे की जमीन और सस्ती होने के बजाए 10.50 करोड़ महंगी कैसे हो गई।
सवाल यह भी उठता है कि जब पाठक दंपती से एक रजिस्ट्री कराई गई तो दूसरी रजिस्ट्री के लिए दलालों को बीच में क्यों डाला गया।

संघ व सरकार नाराज, अब काशी मॉडल से खरीदी जाएगी जमीन
राममंदिर के विस्तारीकरण के लिए खरीदी जा रही जमीन की प्रक्रिया व उठ रहे सवालों से पीएमओ और संघ बेहद नाराज हैं। अब जमीन की खरीद के लिए काशी विश्वनाथ मंदिर और कॉरिडोर के विस्तार के लिए अपनाए जा रहे काशी मॉडल को अपनाया जाएगा।

इस मॉडल की तर्ज पर रजिस्ट्री से पहले प्रशासनिक एक्सपर्ट्स की एक मूल्यांकन समिति से जांच कराई जाएगी। समिति की रिपोर्ट के आधार पर निगोसिएशन कमेटी विक्रेता से बातचीत कर जमीन की कीमत तय करेगी। काशी मॉडल में मूल्यांकन समिति में एसडीएम, सब रजिस्ट्रार, तहसीलदार-कानूनगो और पीडब्ल्यूडी के इंजीनियर शामिल रहते थे।

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