28.1 C
Delhi
Wednesday, October 20, 2021

पूरी दुनिया में गहराया ऊर्जा संकट, कहाँ 600% बढ़े गैस के दाम; जानें दूसरे देशों के भी हाल

नई दिल्ली. भारत में कोयले की सप्लाई में कमी (Coal Crisis) के चलते ब्लैक आउट का खतरा बना हुआ है. जरूरत के मुताबिक पावर प्लांट को कोयला नहीं मिल रहा है. कई राज्यों ने मौजूदा हालात को लेकर चिंता जताई है. इससे पहले चीन (China) में भी कई प्रांतों में बिजली संकट की वजह से प्रभावित हो चुके हैं

- Advertisement -

नई दिल्ली. भारत में कोयले की सप्लाई में कमी (Coal Crisis) के चलते ब्लैक आउट का खतरा बना हुआ है. जरूरत के मुताबिक पावर प्लांट को कोयला नहीं मिल रहा है. कई राज्यों ने मौजूदा हालात को लेकर चिंता जताई है. इससे पहले चीन (China) में भी कई प्रांतों में बिजली संकट की वजह से प्रभावित हो चुके हैं. कई घंटों तक बिजली कटौती की जा रही है. अब आशंका जताई जा रही है कि आने वाले दिनों में पूरी दुनिया में बिजली संकट (Global energy crisis) गहरा सकता है.

आतंकी हमलों की साजिश विफल: दिल्ली से गिरफ्तार हुआ पाकिस्तानी आतंकी मोहम्मद अशरफ

लेबनान बिजली न होने के कारण अंधेरे में डूब गया है. वहीं, यूरोप में प्राकृतिक गैस के लिए लोगों को बहुत ज्यादा कीमत चुकानी पड़ रही है. मौसम की वजह से वैश्विक ऊर्जा की कमी और मांग में फिर से बढ़ोतरी बढ़ती जा रही है. इसने सर्दियों से पहले मुसीबत बढ़ा दी है. इससे कई देशों के अंधेरे में डूबने का खतरा मंडराने लगा है.

भारत के सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, देश के थर्मल बिजली संयंत्रों में अब कुछ ही दिनों का कोयला बचा है. यूपी के कई पावर प्लांट को कोयले की कमी के कारण तो बंद कर दिया गए है. उधर, अमेरिका में शुक्रवार को एक गैलन गैसोलिन के लिए कीमत 3.25 डॉलर पहुंच गई. यूरोप में प्राकृतिक गैस अब तेल के संदर्भ में 230 डॉलर प्रति बैरल के बराबर कारोबर कर रही है.

सोनिया गांधी एवम् वरुण गांधी को एक करने वाला पोस्टर सोशल मीडिया पर वायरल करना प्रयागराज के कांग्रेसी नेता को पड़ा भारी, पढ़िए विस्तार से

कीमतें सितंबर की शुरुआत से 130% से अधिक बढ़ चुकी हैं. पिछले साल इस समय की तुलना में कीमतों में आठ गुना तक वृद्धि हो चुकी है. पूर्वी एशिया में सितंबर की शुरुआत से प्राकृतिक गैस की कीमतों में 85% का इजाफा हो गया है. दरअसल, कोरोना काल के बाद अब जब दुनिया की अर्थव्यवस्था एक बार फिर से चल निकली है तब अचानक से ऊर्जा संकट सप्लाई चेन पर संकट खड़ा हो गया.

आखिर अंधेरे में क्योंर डूबा चीन ?
देखिए, चीन में ऊर्जा संकट के लिए वह खुद से ही जिम्मेयदार है। ऐसा नहीं कि चीन में कोयला का उत्पाुदन बंद हो गया है या चीन की खदानों में कोयला खत्मा हो गया है। दरअसल, चीन अपनी ऊर्जा संयंत्रों के लिए आस्ट्रेालिया से बड़ी तादाद में कोयला लेता था, लेकिन आकस के गठन के बाद दोनों देशों के बीच दूरी बढ़ी। आस्ट्रे लिया और अमेरिका की नजदीकी चीन को नागवार गुजरी। चीन की कम्यु निस्ट सरकार ने आस्ट्रेीलिया से कोयले की आपूर्ति बंद कर दी।

फ्रांस के बाद अब ब्रिटेन से आगे निकलने के करीब भारतीय शेयर बाजार, शीर्ष-5 में हो सकता है शामिल

चीन सरकार ने यह फैसला अचानक से लिया और आस्ट्रेदलिया से कोयले की आपूर्ति तत्काेल बंद कर दी गई। इसका असर चीन में कोयले से चलने वाले संयंत्रों पर पड़ा। कोयला पर निर्भर चीनी संयंत्र बंद होने लगे। इसका सीधा असर ऊर्जा उत्पाचदन पर पड़ा। आकस, दरअसल आस्ट्रे लिया, ब्रिटेन और अमेरिका का एक सुरक्षा गठबंधन है, ज‍िसे चीन अपने खिलाफ मानता है। आकस के गठन के बाद चीन ने आस्ट्रे लिया से अपने संबंधों को तोड़ने के क्रम में यह कदम उठाया। चीन ने आस्ट्रे लिया से कोयला लेना बंद कर दिया।

मंच पर सोते रहे सपा प्रदेश अध्यक्ष नरेश उत्तम, जब उठे तो बोले- अखिलेश ने किसानों को तबाह कर दिया

इस ऊर्जा संकट के अन्या कारण क्या है ?
दरअसल, दुनिया में 90 फीसद बिजली उत्पा दन कोयला संयंत्रों से होती है, लेकिन क्ली न इनर्जी के नाम पर पश्चिमी देशों और अमेरिका में कोयला के उत्पा दन में गिरावट हुई है। इन मुल्कोंो में कोयले के उत्पायदन को प्रो‍त्साइह‍ित नहीं किया जा रहा है। इसके चलते इस पर होने वाले तकनीकी विकास और निवेश का कार्य भी धीमा पड़ गया है। नवकरणीय ऊर्जा के प्रोत्सााहन के चलते कोयला में निवेश बंद हो गया है। इसका व्याकपक असर दुनिया भर के कोल इंड्रस्टी पर पड़ा है। इसके असर दुनिया भर में कोयला उत्पानदन पर पड़ा है। मेरा मानना है कि अमेरिका और पश्चि मी देशों के इस रुख के चलते भी कोयले की मांग और आपूर्ति में बड़ा गैप पैदा हुआ है।

- Advertisement -spot_img
Latest news
- Advertisement -

खबरे जरा हटके

राजनीति

Related news

मनोरंजन

भारत