22.7 C
Delhi
Monday, November 29, 2021

अब त्रिशूल और वज्र से लैस होगी भारतीय सेना, चीनी सैनिकों से मुकाबले के लिए मिलेंगे पारंपरिक हथियार, पढ़िए पूरी खबर

गलवान घाटी में हुए संघर्ष के दौरान चीनी सैनिकों ने भारतीय सैनिकों पर नुकीले तार वाली छड़ों व बिजली के झटके देने वाली बंदूक का प्रयोग किया था। इसके बाद अब वास्तविक नियंत्रण रेखा पर हिंसक झड़प होने की स्थिति में चीन की सेना के इन हथियारों से भारतीय सुरक्षा बल त्रिशूल, व्रज जैसे पारंपरिक हथियारों से निपट सकेंगे

- Advertisement -spot_img

गलवान घाटी में हुए संघर्ष के दौरान चीनी सैनिकों ने भारतीय सैनिकों पर नुकीले तार वाली छड़ों व बिजली के झटके देने वाली बंदूक का प्रयोग किया था। इसके बाद अब वास्तविक नियंत्रण रेखा पर हिंसक झड़प होने की स्थिति में चीन की सेना के इन हथियारों से भारतीय सुरक्षा बल त्रिशूल, व्रज जैसे पारंपरिक हथियारों से निपट सकेंगे।

यह भी पढ़ें – PoK में गुप्त बैठक और 200 हत्या का लक्ष्य, कश्मीरी पंडित और गैर मुस्लिम हैं निशाना, भारत में हाई अलर्ट जारी

नोएडा की कंपनी एपेस्टेरॉन प्राइवेट लिमिटेड ने पारंपरिक भारतीय हथियारों से प्रेरित होकर इन हथियारों को विकसित किया है। इनका इस्तेमाल कर दुश्मन को कुछ देर के लिए बेहोश या निष्क्रिय किया जा सकता है। एपेस्टेरॉन के सीटीओ मोहित कुमार ने कहा कि गलवान में चीनी सेना द्वारा भारतीय सैनिकों के विरुद्ध कंटीले तारों से लिपटे डंडों का उपयोग किए जाने के बाद सुरक्षा बलों ने हमें ऐसे हथियार विकसित करने के लिए कहा था।

यह भी पढ़ें – खुली जगह नमाज पढ़ने के विरोध में माइक लेकर उतरे लोग, सड़क पर गाया भजन, मामला सँभालने में पुलिस के छूटे पसीने

न्यूज एजेंसी ANI से बातचीत में कंपनी के CTO मोहित कुमार ने कहा कि गलवान संघर्ष में चीनी सैनिकों द्वारा हमारे सैनिकों के खिलाफ wired sticks और tasers के इस्तेमाल करने के बाद भारतीय सुरक्षा बलों ने हमें गैर-घातक उपकरण विकसित करने के लिए कहा था। चीनी सैनिक तैनाती के दौरान अपने पारंपरिक हथियार अपने पास रखते हैं।उन्होंने बताया कि हमने भारतीय सुरक्षा बलों के लिए अपने पारंपरिक हथियारों से प्रेरित ऐसे ही टैसर और गैर-घातक भी विकसित किए हैं।

यह भी पढ़ें – बच्चों की 85 लाख अश्लील तस्वीरें खींचकर शख्स ने कमाए 26 करोड़, कोर्ट ने सुनाई 27 साल की जेल की सजा

मोहित ने बताया कि हमने भारतीय सुरक्षा बलों के लिए अपने पारंपरिक हथियारों से प्रेरित ऐसे ही टैसर और गैर-घातक भी विकसित किए हैं। विभिन्न उपकरणों का प्रदर्शन करते हुए, उन्होंने कहा कि वज्र नाम से स्पाइक्स के साथ एक मेटल रॉड टेजर विकसित किया गया है। इसका इस्तेमाल दुश्मन सैनिकों पर आक्रामक रूप से हमला करने के लिए हाथ से मुकाबला करने के साथ-साथ उनके बुलेट प्रूफ वाहनों को पंचर करने के लिए भी किया जा सकता है।

यह भी पढ़ें – चुनाव से पहले योगी सरकार पूरा कर सकती है एक और वादा, भूमाफियाओं से खाली कराई जमीन पर बनाएगी सस्ते घर

उन्होंने बताया कि वज्र में स्पाइक्स भी हैं जो एक लिमिटेड  मात्रा में करंट डिस्चार्ज करते हैं। ये दुश्मन के सैनिक को आमने-सामने की लड़ाई के दौरान अप्रभावी बना सकते हैं। कुमार ने त्रिशूल का प्रदर्शन किया, जिसका उपयोग विरोधियों के वाहनों को रोकने के साथ-साथ निषिद्ध क्षेत्रों में प्रवेश करने की कोशिश करने के लिए किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि टेसिंग उपकरण से आने वाली सबसे अच्छी प्रतिक्रिया या प्रतिक्रिया को ‘सैपर पंच’ कहा जाता है, जिसे सर्दियों के सुरक्षा दस्ताने की तरह पहना जा सकता है और इसका इस्तेमाल हमलावर दुश्मन सैनिकों को करंट का झटका देने के लिए किया जा सकता है।

यह भी पढ़ें – क्या आपकी भी गर्दन और कमर में रहता है दर्द ? तो इन बातों का रखें ख्याल, जल्द मिलेगा आराम

भारतीय सैनिकों को प्रदान किए गए विभिन्न प्रकार के उपकरणों की क्षमताओं का प्रदर्शन करते हुए, कुमार ने कहा कि उनमें से कोई भी मौत या किसी भी गंभीर चोट का कारण नहीं बन सकता है, लेकिन दुश्मन सैनिकों को हाथ से होने वाली लड़ाई के दौरान अस्थायी रूप से अप्रभावी बना सकता है। जब मोहित से ये सवाल किया गया कि भारतीय सुरक्षा बलों की किस संस्था ने उनसे इन उपकरणों को बनाने के लिए कहा था, इसपर उन्होंने किसी भी संस्था का नाम बताने से इंकार कर दिया। उन्होंने कहा कि ये हथियार किसी भी आम नागरिक को नहीं बेचे जाएंगे।

- Advertisement -spot_img
Latest news
- Advertisement -

खबरे जरा हटके

राजनीति

Related news

मनोरंजन

भारत