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Monday, November 29, 2021

देश में हिंदुओं पर हिंसा मामले में दिल्ली के वकील ने बांग्लादेश चीफ जस्टिस को…

बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों पर हो रहे हमलों की दुनियाभर में निंदा की जा रही है. भारत के अलग-अलग शहरों में हिंदुओं के खिलाफ हिंसा को लेकर विरोध प्रदर्शन हुए हैं. वहीं, दिल्ली के रहने वाले वकील विनीत जिंदल ने हिंदुओं पर हुए हमलों को लेकर बांग्लादेश की सुप्रीम कोर्ट को पत्र याचिका भेजी है

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बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों पर हो रहे हमलों की दुनियाभर में निंदा की जा रही है. भारत के अलग-अलग शहरों में हिंदुओं के खिलाफ हिंसा को लेकर विरोध प्रदर्शन हुए हैं. वहीं, दिल्ली के रहने वाले वकील विनीत जिंदल ने हिंदुओं पर हुए हमलों को लेकर बांग्लादेश की सुप्रीम कोर्ट को पत्र याचिका भेजी है. गौरतलब है कि बांग्लादेश में कट्टरपंथियों की भीड़ ने एक सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर हिंदुओं के घरों में आग लगा दी और मंदिरों में तोड़फोड़ की है.

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वकील विनीत जिंदल द्वारा भेजी गई पत्र याचिका में कहा कि बांग्लादेश में हो रहे हिंदुओं और उनके मंदिरों पर हमलों की जांच की जाए. बांग्लादेश सुप्रीम कोर्ट से पत्र याचिका में कहा गया कि वहां पर रह रहे तमाम हिंदुओं को सुरक्षा मुहैया करायी जाए. याचिका में कहा गया कि बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों के साथ लूटमार हत्या और जबरदस्ती धर्म परिवर्तन कराए जा रहे हैं. इसमें कहा गया कि बांग्लादेश में हिंदू महिलाओं के साथ दुष्कर्म किया जा रहा है. वकील ने अपनी याचिका में बांग्लादेश में हिंदुओं और मंदिरों पर हो रहे हमले की बांग्लादेश के सुप्रीम कोर्ट के सीटिंग जज की अध्यक्षता में न्यायिक जांच की मांग की.

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याचिका में हिंदुओं के मानवाधिकार हनन का मसला उठाया
याचिका में कहा गया है कि बांग्लादेश में हिंदू आबादी सबसे बड़ा अल्पसंख्यक समुदाय लगभग 8 फीसदी है. इनकी साक्षरता दर अच्छी रहने की वजह से बांग्लादेश के सामाजिक-आर्थिक विकास में इनका अहम योगदान रहा है, लेकिन इसके बावजूद देश में लगातार हिंदू समुदाय के मूल अधिकारों का उल्लंघन हो रहा है. उनके साथ लूट, हिंसा उनकी ज़मीनों पर कब्जे के साथ साथ हिंदू महिलाओं पर यौन हमले हो रहे हैं. हाल ही में दुर्गापूजा के दौरान कई मंदिरों पर हमले हुए. पंडालों में पूजा के लिए स्थापित की गई मंदिरों को खंडित किया गया.

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यूं तो बांग्लादेश का संविधान सभी धर्मों के मानने वाले वालों के मानवाधिकार और संस्कृति के संरक्षण की बात करता है. संविधान के मुताबिक हिंदुओं को भी अपनी धार्मिक परंपराओं के निर्वहन का पूरा अधिकार हासिल है, लेकिन इसके बावजूद हिंदू समुदाय को इससे रोका जा रहा है. उनके धार्मिक संस्थाओं को टारगेट करने के साथ साथ धर्म परिवर्तन के लिए मजबूर किया जा रहा है. बांग्लादेश की सरकार अल्पसंख्यक हिंदू समुदाय के हितों की रक्षा करने में विफल रही है.

याचिका में मांग
वकील विनीत जिंदल ने याचिका में हिंदू समुदाय और मंदिरों पर हमले की हालिया घटनाओं की बांग्लादेश सुप्रीम कोर्ट के सिटिंग जज की निगरानी में जांच कराने की मांग की है. याचिका में कहा गया है कि बांग्लादेश सुप्रीम कोर्ट वहां की सरकार को हिंदुओं और मंदिरों की पर्याप्त सुरक्षा सुनिश्चित का निर्देश दे. इसके अलावा मारे गए लोगो के परिजनों को 1 करोड़ टका का मुआवजा दिया जाए.

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क़ानूनी जानकारों की राय
संविधान के जानकार ज्ञानंत सिंह का कहना है कि नागरिकों के जीने का अधिकार ऐसा मूल अधिकार है, जिसको लेकर कोई ग़ैर नागरिक भी बांग्लादेश सुप्रीम कोर्ट का रुख कर सकता है. हालांकि दिल्ली के वकील विनीत जिंदल इस मामले में प्रभावित पक्ष नहीं है, उन्होंने पत्र याचिका में बांग्लादेश में रहने वाले हिंदुओ के मूलाधिकारों के हनन का मसला उठाया है लेकिन बांग्लादेश सुप्रीम कोर्ट चाहे तो उनके पत्र या फिर विदेशी समाचार पत्रों की ख़बर पर भी स्वतः संज्ञान लेकर सुनवाई कर सकता है.

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संयुक्त राष्ट्र ने की हमलों की निंदा
याचिका में बांग्लादेश सुप्रीम कोर्ट से बांग्लादेश में हिंदू मंदिरों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की. इसमें बांग्लादेश सुप्रीम कोर्ट से हिंदुओं के खिलाफ हिंसा का शिकार हुए पीड़ित परिवार को एक लाख का मुआवजा देने की भी मांग की गई. वहीं, संयुक्त राष्ट्र (United Nations) ने इस हमले की निंदा की है. संयुक्त राष्ट्र के रेजिडेंट कोऑर्डिनेटर मिया सेप्पो (Mia Seppo) ने कहा, बांग्लादेश में अल्पसंख्यक हिंदुओं पर हमले उसके संविधान में निहित मूल्यों के खिलाफ हैं. प्रधानमंत्री शेख हसीना (Sheikh Hasina) की सरकार को घटनाओं की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने की जरूरत है.

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अमेरिका ने बांग्लादेश में हिंदुओं पर हमलों की घटनाओं की निंदा की
अमेरिका (America) ने बांग्लादेश में अल्पसंख्यक हिंदू समुदाय के लोगों पर हाल में हुए हमलों की घटनाओं की निंदा की है. विदेश मंत्रालय के एक प्रवक्ता ने कहा, ‘धर्म चुनने की आजादी, मानवाधिकार है. दुनिया का प्रत्येक व्यक्ति, फिर चाहे वह किसी भी धर्म या आस्था को मानने वाला हो, उसका अपने अहम पर्व मनाने के लिए सुरक्षित महसूस करना जरूरी है.’ प्रवक्ता ने कहा, ‘विदेश मंत्रालय, बांग्लादेश में अल्पसंख्यक हिन्दू समुदाय के लोगों पर हाल में हुए हमलों की घटनाओं की निंदा करता है.’

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