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Wednesday, January 26, 2022

राजनीति: ऐसे ही वापस नहीं लिया गया कृषि कानून, सात राज्यों के विधानसभा चुनावों को साधने की है तैयारी

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अगले साल आसन्न सात राज्यों के विधानसभा चुनावों को लेकर इसके बड़े राजनीतिक मायने हैं. खासकर पंजाब विधानसभा चुनाव के मद्देनजर कह सकते हैं कि बीजेपी के इस दांव ने कहीं न कहीं कांग्रेस को बैकफुट पर ला दिया है. खासकर जब कांग्रेस पंजाब में पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह के पार्टी छोड़ने के बाद चुनाव परिणामों को लेकर थोड़ी आशंकित हो गई है.

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कवरेज इंडिया न्यूज़ डेस्क

नई दिल्ली: राजनीति में संकेतों का खास महत्व है. ऐन गुरु पर्व के दिन तीनों कृषि कानूनों की वापसी का पीएम नरेंद्र मोदी का ऐलान वास्तव में भारतीय जनता पार्टी का मास्टर स्ट्रोक है. अगले साल आसन्न सात राज्यों के विधानसभा चुनावों को लेकर इसके बड़े राजनीतिक मायने हैं. खासकर पंजाब विधानसभा चुनाव के मद्देनजर कह सकते हैं कि बीजेपी के इस दांव ने कहीं न कहीं कांग्रेस को बैकफुट पर ला दिया है. खासकर जब कांग्रेस पंजाब में पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह के पार्टी छोड़ने के बाद चुनाव परिणामों को लेकर थोड़ी आशंकित हो गई है. करेला वह भी नीम चढ़ा की तर्ज पर कृषि कानूनों की वापसी पर कैप्टन के सधे शब्दों वाली प्रतिक्रिया ने तस्वीर काफी हद तक साफ कर दी है.

कैप्टन-शाह की मुलाकातों से लगे थे कयास

इस पूरे प्रकरण के अगर राजनीतिक निहितार्थ देखे जाएं तो साफ है कि पंजाब में कैप्टन और बीजेपी की पकती खिचड़ी में अब सिर्फ छोंक लगनी ही रह गई है. गौरतलब है कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से अपनी मुलाकातों के दौरान कैप्टन ने कृषि कानूनों को लेकर आंदोलनरत किसानों का मसला उठाया था. इस मेल-मुलाकात के बाद ऐसी अटकलें भी लगी थी कि पंजाब विधानसभा चुनाव के मद्देनजर मोदी सरकार ऐन चुनाव से पहले कृषि कानूनों पर कोई बड़ा कदम उठा सकती है. हुआ भी कुछ ऐसा ही जब पीएम नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को राष्ट्र के नाम अपने संबोधन में कृषि कानूनों की वापसी का ऐलान कर दिया. इस दौरान उन्होंने प्रकाश पर्व की बधाई दी. यानी साफ है कि मोदी सरकार का पीछे उठा यह कदम पंजाब में बढ़ते कदमों की बानगी भर है.

कैप्टन के ट्वीट में कर दी तस्वीर साफ

पीएम मोदी के इस ऐलान के बाद ही कैप्टन अमरिंदर सिंह ने बेहद सधे शब्दों में प्रतिक्रिया दी. इस प्रतिक्रिया में भी कैप्टन ने पंजाब को लेकर आने वाले राजनीतिक घटनाक्रम की झलक पेश कर दी. गौरतलब है कि कैप्टन ने कृषि कानूनों की वापसी के पीएम मोदी के ऐलान पर ट्वीट करते हुए लिखा- गुरु नानक जयंती के पवित्र अवसर पर हर पंजाबी की मांगों को मानने और तीन कृषि कानूनों को निरस्त करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का धन्यवाद. मुझे विश्वास है कि केंद्र सरकार किसानी के विकास के लिए मिलकर काम करती रहेगी.

अंतर्कलह से जूझती कांग्रेस के लिए शुभ संकेत नहीं

गौर करें कि कैप्टन के ट्वीट में आगे मिल कर काम करती रहेगी का उल्लेख है. यानी कांग्रेस में वापसी को सिरे से खारिज कर चुके कैप्टन जो नई पार्टी बनाने जा रहे हैं, उसका पंजाब चुनाव से पहले या दौरान बीजेपी से गठबंधन तय है. यही वह मास्टर स्ट्रोक है, जिसकी चर्चा राजनीतिक पंडित कर रहे हैं. बीजेपी ने कृषि कानूनों को वापस लेकर कैप्टन की नई राजनीतिक पार्टी के हाथों बहुत बड़ा मुद्दा पकड़ा दिया है, जिसे कैप्टन अपनी जीत बतौर पेश करेंगे. इसके साथ ही बीजेपी अकाली दल से अलग होने के बाद अपने दम पर खड़े होने की कोशिशों को कैप्टन की मदद से अब और परवाज दे सकेगी. यही बात कांग्रेस के लिए बड़ा झटका साबित हो सकती है. वजह यह है कि पंजाब के सीएम चरणजीत सिंह चन्नी औऱ सूबे में कांग्रेस के अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू की अनबन खुले में आ चुकी है. ऐसे में आंतरिक कलह से जूझती कांग्रेस के लिए कृषि कानून की वापसी राजनीति के लिहाज से शुभ संकेत नहीं है.

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