Mon. Aug 10th, 2020

कवरेज इंडिया

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बड़ी हवेली की छोटी मालकिन

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आशूतोष राणा, कवरेज इण्डिया। 

बड़ी हवेली की छोटी मालकिन, जी हाँ पूरा शहर उनको इसी नाम से जानता था। जिस बड़ी हवेली में वे रहतीं थीं इसका कोई पुरातात्विक महत्व नहीं था किंतु इसके बाद भी पूरे शहर में इसकी चर्चा किसी ऐतिहासिक इमारत से कम नहीं होती थी इसका कारण मात्र इतना था कि इस हवेली का निर्माण इनके पति ने ‘हवाला’ से प्राप्त धन की कमाई से किया था। ऐसा नहीं है कि हवाला के गर्भ से उत्पन्न हुई इस हवेली में छोटी मालकिन के अलावा कोई बड़ी मालकिन भी रहती थीं ? नहीं जी, छोटी मालकिन ही हवेली की एकमात्र रहवासी और मालकिन थीं।

एक दिन बातों ही बातों में मैंने उनसे पूछ धरा- आप इतनी बड़ी हवेली में अकेली रहती हैं ? तब आप अपने आपको मालकिन ना कहकर छोटी मालकिन क्यों कहती हैं ?

 

छोटी मालकिन ने रहस्योद्घाटन करते हुए कहा- जब लोग ‘भगवान की कृपा से’ रातों रात बड़ी सफलता प्राप्त कर लेते हैं तब वे दुनिया की नज़र में आ जाते हैं, चूँकि दुनिया की ज़्यादातर नज़रें बुरी नज़र ही होती हैं इसलिए नज़र में आते ही स्वाभाविक रूप से हमें सबसे पहले बुरी नज़र लगती है तो इस बुरी नज़र से बचने का सबसे आसान टोटका है कि स्वयं को छोटा बता दो, जैसे यदि आप अरबपति हैं तो आप अपना नाम अमीरचंद की जगह भिखारीलाल रख लें आप बुरी नज़र से बच जाएँगे और कालांतर में लोग आपकी सम्पत्ति से प्रभावित होकर स्वयं ही आपके नाम के आगे सेठ लगा देंगे। बड़ी हवेली के सुख भोगते हुए अपने आपको छोटा बताकर मैं अपनी सम्पत्ति को बचाते हुए विपत्ति से बची रहती हूँ।

 

मैंने उनके वक्तव्य से प्रभावित होते हुए कहा- अक्सर जिनका जलवा होता है वे चर्चा में बने रहते हैं किंतु आप सिर्फ़ चर्चा में रहकर अपना जलवा बनाने में मास्टर हैं।

छोटी मालकिन पुलकित होते हुए बोलीं- भाईसाहब, जलवेदार हुए बिना चर्चा में रहना कोई आसान काम नहीं है, इसके लिए कई क़िस्म के हथकंडे, ठठकरम करने पड़ते हैं और फिर स्वयं पर मुग्ध होते हुए बोलीं- मैंने तो इन सभी ठठकर्मों में Phd की हुई है..देखिए आजकल टैलेंट बैलेंट कोई नहीं देखता। मार्केटिंग का ज़माना है भाईसाहब, इंसान को अपने आपको बेचना आना चाहिए। आप कभी मेरे पर्सनैलिटी डिवेलप्मेंट सेंटर पर आइए ना।

 

मैंने चकित होते हुए पूछा- आपका कोई सेंटर भी है क्या ?

जी, जी हवेली के पिछवाड़े ही तो है ! उसका नाम है- “हाउ टू बीकम जलवेदार इन फ़्यू डेज़” इस सेंटर में पब्लिक स्पीकिंग से लेकर अपनी ग़लत बात को सही सिद्ध करने की तकनीक, अपना फ़ोकस-भौकाल-जलवा कैसे बनाना है के गुर सिखाए जाते थे।

मैंने उनको कुछ और खोलने की नियत से कहा- शहर में लोग आपको इमिज बिल्डिंग का जादूगर मानते हैं, आपने बहुत से अनजान लोगों को अपनी अड्वाइस से पहचान वाला बना दिया।

 

छोटी मालकिन अपनी प्रशंसा सुनकर प्रसन्नता से खिल उठीं और बोलीं- यू सी.. यदि आप अपना जलवा बनाना चाहते हैं तो किसी जलवादार व्यक्ति का तलवा पकड़ लीजिए और उसे बड़ी होशियारी से चाटने का काम कीजिए आप देखेंगे की कुछ ही दिनों में उस व्यक्ति का तलवा आपका जलवा बना देगा। और यदि किसी कारणवश तलवा चाटने में आपको शर्म या संकोच है तो फिर आप अपनी हरकतों से किसी जलवादार व्यक्ति को इतना मजबूर कर दीजिए की वो आपके प्रति जल उठे, उसके जलने से उत्पन्न हुई रोशनी में आप अंधेरे में खड़े होने के बाद भी संसार को दिखाई देने लगेंगे। छोटी मालकिन ने अपने कथन को और अधिक प्रभावशाली बनाने के लिए उसमें अंग्रेज़ी का छौंका लगाते हुए कहा- ओन्ली टू रोड्ज़ टू अचीव जलवा इक्सेप्ट धिस नो अदर रोड. ( इन दो रास्तों के अलावा जलवा प्राप्ति का अन्य कोई मार्ग नहीं है।) आप या तो किसी को रिझाकर वरदान प्राप्त कर सकते हैं या खिजाकर। अब ये आपकी अपनी क्षमता और रुचि पर निर्भर करता है कि आप चाटकर बड़े होना चाहते हैं या चिढ़ाकर। लेकिन माई इक्स्पिरीयन्स सेज़ कि आप किसी जलवेदार व्यक्ति को चिढ़ाने का प्रयास मत कीजिए क्योंकि इसमें ख़तरा है, आप चमकने की जगह चटक भी सकते हैं।

 

मैंने समझने के भाव से गम्भीरतापूर्वक गर्दन हिलाते हुए कहा- लेकिन शहर में ये चर्चा भी लोग करते हैं कि आपकी ये आलीशान हवेली हवाला के पैसों से बनी है ?

छोटी मालकिन फाटक से बोलीं- जेलसी.. टेल मी, व्हाट इज़ हवाला ? डू यू नो दी रियल मीनिंग ऑफ़ हवाला ?

मैंने ना में गर्दन हिलाकर उनकी तरफ़ देखा। वे मेरे अज्ञान पर मुस्कुराते हुए बोलीं- जिसे हवा लेकर आए या जो हवा में आए.. हवा + ला = हवाला, करेक्ट ? नाउ, मुझे बताइए केन यू सी हवा ? नो ना। एंड केन यू सी धा गॉड ? नो.. बोथ आर अन्सीन.. जो भी अन्सीन होता है उसे भगवान कहते हैं, तो मेरे पति को जो भी मिला है वो भगवान की कृपा से मिला है। इट्स अ ब्लेसिंग ऑफ़ गॉड.. पीपल आर अनपढ़, धे डोंट नो धी रियल मीनिंग धे ओन्ली अंडरस्टैंड जेलसी.. धिस इज़ धा केस ओन्ली।

 

मैंने चमत्कृत भाव से कहा- वाह छोटी मालकिन वाह.. मैं तो अभी तक हवाला को आर्थिक अपराध समझता था लेकिन आज अपने मुझे बताया कि हवाला भगवान की ना दिखाई देने वाली कृपा है !! मैंने दोनों हाथ जोड़कर उनको प्रणाम करते हुए कहा- आपसे बात करके अच्छा लगा मैं किसी दिन आपके सेंटर अवश्य आऊँगा जिससे खुद को बेचने की कला सीख सकूँ, लेकिन फ़िलहाल मैं यहाँ से अन्सीन होना चाहता हूँ। वे कुछ कहतीं इससे पहले ही मैं वहाँ से अन्सीन हो गया।

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