November 23, 2020

कवरेज इंडिया

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दिल खुश हो जाएगा पढ़कर, प्रयागराज के साहित्यकार डा. श्लेष गौतम की यह दिलचस्प कहानी, ‘एक दिवाली 7 जुआरी’

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कवरेज इण्डिया न्यूज़ डेस्क

दीपावली और जुएं की दोस्ती-यारी कब से है ना तो इसका मेरे पास कोई ऐतिहासिक प्रमाण है और ना ही दिल्ली लखनऊ के सूचना और गोपनीय विभाग से जारी कोई औपचारिक दस्तावेज़ या घोषणा पत्र। व्यवहारिकता और लोकाचार के तकाज़े से इन दोनों के गहरे और अमिट-अनंत संबंधों की पुष्टि होती है बस।वैसे भी दीपावली में तो शायद पैसे रुपए ज़ेवर,सामान आदि ही दांव पर लगते हों पर घर-बाहर दफ्तर अब तो हर जगह ही किसी न किसी का कुछ ना कुछ दांव पर लगा हुआ है। सीधे-सीधे आते हैं जुआरी भाई लोगों के मामले पर,मधुशाला की तरह जुएं का अड्डा भी भारतीय संविधान की मंशानुरूप धर्मनिरपेक्षता,एकता, भाईचारे और समानता का जीता-जागता जीवंत प्रतीक है,जैसे न्यायालय के फैसले के बाद पक्ष-विपक्ष गौण हो जाता है और जीत संविधान की मानी जाती है ठीक उसी तरह जुएं में हारे-जीते कोई,जीत अंततः जुआ देवता की होती है।जुआं देवता संबोधन पर मुझे स्त्री विरोधी न समझा जाए क्योंकि अव्वल तो जुआं शब्द पुल्लिंग है,दूसरी बात इसमें स्त्रियों की भागीदारी बेहद कम है लगभग न के बराबर दिखी मुझे लिहाज़ा जुआं देवता न की जुआं म‌ईया।

 

बहरहाल सालाना बोनस की तरह जुंआरी भाई लोग दीपावली पर जुआं खेलने का इंतज़ार करते हैं,और हां एक विशेष बात,मैं यहां पर रेगुलर या बारहमासा जुआरियों की बात कतई नहीं कर रहा जो साल भर जुएं की फड़ पर फड़फड़ाते रहते हैं,मैं तो उन सभी की बात कर रहा हूं जो त्योहारी मौज-मस्ती के लिए जुआं खेलते हैं। ख़ैर दुनिया धनतेरस के दिन खरीदारी करती होगी बर्तन जेवर लाई लावा मिठाई आदि यह जुआरी भाई लोग जय जुआं देवता कहते हुए ताश के पत्तों की कई गड्डियां एक साथ ख़रीदते हैं।अरे भाई अनुभव भी तो कोई चीज़ होती है लिहाज़ा खेल के दौरान होने वाली चिराईन और चूं चपड़ में होम होने वाली गड्डियों में यह विशेष रिज़र्व ही काम आता है और तो और कई बार किसी की इच्छा कटिंग की तो कुछ की तीन पत्ती की होती है, सो मौके पर कौन ख़रीदने जाए।

 

मोहल्ले के साथ्त हिंदुस्तानी राजू,गुड्डू,नाटे मियां,मोन,चिंटू,बबलू डीलर और एस•पी• भाई एक जगह पर एक साथ इकट्ठे हुए। एसपी भाई के घर के पीछे बने गोदाम में रोज़ जुआं खेलने की सर्व-सहमति बनी, सुबह शाम का शेड्यूल तय हुआ साथ ही आसपास के लुच्चे-लफंगे और प्रोफेशनल जुआरियों की नज़रों से बचकर इकट्ठा होने की जुगत लगाई गई।एस•पी•भाई बोले-चिंता की कोई बात नहीं इलाके के दरोगा-सिपाही से गले मिलाप का सिलसिला मैंने बढ़ा दिया है, लॉकडाउन के समय से ही, साथ ही इन दिनों रास्ते बदल-बदल कर नमस्ते ठोकता रहता हूं,मिठाई नमक़ीन अलग।तभी नाटे मियां बोले- भाई बाईक कहां रखेंगे हम लोग गोदाम में तो जगह है ही नहीं,रास्ता भी संकरा है!बबलू डीलर लप से बोले-पगलेठ न बनो आधा दर्जन बाईक खड़ा करना बिल्ली को दूध का न्योता देने जैसा है।राजू बोले-हम इतनी दूर से पैदल आएंगे और बिल्ली दूध ई सब का है!सीधा-सीधा समझाओ भाई।बबलू डीलर दार्शनिक अंदाज़ में बोले- सावन के अंधे की तरह दीपावली के मौसम में भीड़भाड़ का मतलब और वह भी करो ना के समय जब हर जगह सोशल डिस्टेंसिंग के कानून लागू है जुएं की खड़ी फसल पुलिस हमेशा काटै के लिए तैयार रहती है,और अगर बाइक में इसी तरह बैठ कर आओगे तो पक्का सरकारी जीप में बैठकर जाओगे और जुआं के साथ-साथ करोना के नाम पर पचीस धारा अलग।सहमति बन गई।

 

शाम तक सभी खिलाड़ी एस•पी•भाई के गोदाम में बारी-बारी से पहुंचे, बक़ायदा मास्क लगाए,जेब में दो-दो सैनिटाइजर ठूंसे।जय जुआं देवता के उद्घोष के साथ ही ताश की फेटाई शुरू हो गई।हंसी-मज़ाक के बीच जुएं का दौर चल पड़ा,बबलू बोले-अबे अब तो मुंह से हटाए लो मास्क कि अंदर हव आऊर ई बार-बार सेनेटाइजर के छिड़काव बंद करो में उलझन होत है, अब जो होई सो होई। गुड्डू बोले-मोनू और चिंटू तो आज तक एक पैसा ब्लाइंड पर नहीं लगाए ट्रेल,रन और कलर के बिना तो यह दोनों चाल ही नहीं चलते।मोनू और चिंटू बहुत खिसियाये है पर बाकी सब ने समर्थन कर दिया।मोनू खिसिया के बोल पड़े जब भगवान आंख देखे खातिर दिए हैं मूंदै ख़ातिर नहीं।

 

इतने में ही एक बुलेट मोटरसाइकिल की हल्की-हल्की आवाज़ सबने एक साथ महसूस की।धीरे-धीरे यह आवाज़ क़रीब और क़रीब होने लगी और सब का कलेजा मुंह को आने लगा कुछ तो अभी इसी लॉकडाउन के दौरान फर्जी घूमने-फिरने की खुशी में आगे पीछे बहुत डंडा पाए थे। बहरहाल धड़कन बंद हो इससे पहले पत्ते छुपा दिए गए‌। एस•पी• भाई सबका चेहरा देखते हुए मन ही मन बुदबुदाये,इतना चाय-नाश्ता सब कराए सरवा नमक की कोई वैल्यू ही नहीं रही।ज़ुबान का कोई मतलब ही नहीं नहीं रहा।भैया ईमानदारी नैतिकता नाम की चीज़ अपने भारत ह‌ई नहीं।तभी बुलेट की आवाज़ एकदम गोदाम के मुहाने पर आकर थम गई इधर सबकी सांसे थमने और होंठ सिलने लगे।तभी मुहाने से आवाज़ आई,कल्लू मिस्त्री।

 

एसपी आवाज़ पहचान गए और सब को आश्वस्त कर दरवाज़ा खोले। पहले तो कल्लू के मुंह पर मास्क देखकर नहीं पहचाने पर फिर तस्दीक हो गई कि यह कल्लू ही हैं।कल्लू बोला-भाई बुलेट सर्विस का ट्रायल ले रहे थे कि तेल खत्म हो गया, भाई थोड़ा पेट्रोल मिलेगा क्या!इस सवाल और ख़लल से गुस्सा तो बहुत आया पर जो भी हो इसका आना पुलिस से तो ठीक ही रहा फिर भी फोकट में तेल ना देना पड़े इसीलिए एस•पी• बोले-कल्लू भाई तेल कहां होगा दोनों गाड़ियां घर के काम से बाहर गई हैं।ख़ैर कल्लू तो निपटा महफिल फिर जमने लगी।बल्लू डीलर बोले इतना डराए के हो तो मत खेला करो में तुम लोग।क‌ऊनो डॉक्टर थोड़ी कहीस जुआ खेलै के लिए‌।खेल फिर बढ़ने लगा खेलते-खेलते भूख लगना लाज़मी था सो एक लोकल रेस्टोरेंट को फोन कर फोन पर ही खाने की होम डिलीवरी का ऑर्डर दे दिया गया।लगभग घंटे भर बाद गोदाम की दरवाजे की कुंडी फिर खड़की।

 

भूख सबको लग चुकी थी और कल्लू मिस्त्री वाले विवाद के प्रसंग से डर का भूत भी भाग चुका था फट से दरवाजा खोलते ही बबलू डीलर सामने मुखातिब व्यक्ति से बोले-“खाना लाए हो” उसने एक जबर झन्नाटेदार थप्पड़ बबलू डीलर के गाल पर रसीद करते हुए कहा-“खाना नहीं पूरा थाना लाए हैं” सभी को सांप सूंघ गया।तभी 10-12 वर्दीधारी अंदर उनके कंधे पर सजे सितारों को देखकर जुआरी भाइयों को अपने सितारे गर्दिश में नज़र आने लगे।”हम कोतवाली से आए हैं हमें सूचना मिली थी जुएं की जो सच भी साबित हुआ”-इंस्पेक्टर बोला।किसका गोदाम घर है ये! इंस्पेक्टर की आवाज़ गूंजी।एस•पी•भाई की,सिवाय एस•पी•भाई के सभी ने कहा।

 

एस•पी• यह शब्द सुनते ही इंस्पेक्टर ने गियर बदला और बेहद विनम्र और शांति तथा अतिरिक्त आदर के भाव से कहा-सर बाकी साहबों की तरह आप भी पहले से बता देते,हमसे ग़लती हो गई है।सर आप कहां के एस•पी• हैं! एस•पी•भाई की आवाज़ हलक में फंस ग‌ई जैसे पहली बार मछली खा रहे व्यक्ति के गले में कांटा।बोले-हम तो इनवर्टर बैटरी की सप्लाई का धंधा करते हैं,हमारा नाम सूर्यप्रकाश है और सभी दोस्त यार हमें प्यार से एस•पी• कहते-बुलाते हैं।इसके बाद सातों हिंदुस्तानी जुआरी भाई ज़मीन पर ताश के पत्तों की तरह और यूज़्ड कोरोना मास्क की तरह बिखरे-बिछे नज़र आए।

 

एक सिपाही ने भी कहा-“अरे सर देखिए यहां सोशल डिस्टेंसिंग भी नहीं है,और पैर से ऑपरेट होने वाली सैनिटाइजिंग मशीन भी, और सर देखिए जो गड्डी और पैसे दिख रहे हैं उन पर भी नहीं लग रहा है कि सेनेटाइजर का छिड़काव हुआ है, न छिट्टा दिखाई दे रहा मना ही खुशबू आ रही है,नामुराद जुआरी”।बहरहाल लगभग चार लाख नक़द 10 अंगूठी, सोने की ज़ंजीर आदि लेकर 8 लाख की वसूली हुई।बहुत हाथ जोड़ने और घर-परिवार का वास्ता देने के बाद गिरफ्तारी तो नहीं पर नज़राने के तौर पर छापामारी दस्ते में शामिल सभी वीरों के घर दीपावली का उजाला फैल सके इसलिए 1-1 जोड़ी नई बैटरी इन्वर्टर का इंतज़ाम किया गया। रेस्टोरेंट की होम डिलीवरी का इंतज़ार अब बेकार था,सभी का पेट लात-जूते और मुक्के से भर चुका था ज़लालत मिली सो अलग,लंगड़ाते हुए बबलू डीलर बोले-“मुखबिरी भई है,कल्लू मिस्त्री साला दिल का भी काला निकला।एस•पी•भाई तुम बिना हमसे पूछे ओका मना कर दियो आऊर ऊ झल्ल में पुलिस के कंधे पर सर रख दिहिस।अगले दिन के समाचार पत्रों में एक प्रमुख ख़बर छपी,लगभग बोल्ड अक्षरों में कि,पुलिस का त्वरित छापा जुआरियों में ज़बरदस्त हड़कंप,अंधेरे का लाभ उठाकर भागे मगर मौके से चार ताश की गड्डी ₹5000 नकद बरामद।।

 

डॉ श्लेष गौतम

 

 

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