November 30, 2020

कवरेज इंडिया

खबर पल-पल की

लक्ष्मीबाई के त्याग, बलिदान और राष्ट्रभक्ति से लेनी होगी प्रेरणा – मेजर डॉ. एस. पी. सिंह

1 min read

अरूण मिश्र, कवरेज इण्डिया बहराइच

बहराइच। जिस राष्ट्रीय भावना से प्रेरित होकर अट्ठारह सौ सत्तावन की क्रांति के अमर सेनानियों ने देश की स्वतंत्रता का प्रण लेते हुए अपना सब कुछ दांव पर लगा कर प्राणों की आहुति दे दी थी उनमें से महारानी लक्ष्मीबाई एक थी। जीवन की परवाह किए बिना जिस प्रकार अपने राज्य की रक्षा के लिए उन्होंने अपने प्राणों की बलि दी वह आज एक असाधारण घटना थी। उन जैसे वीरों के उदाहरण को लेकर भारतीय स्वतंत्रता का संघर्ष आगे बढ़ा और 1947 का दिन हम सब देख पाए।आज आवश्यकता इस बात की है कि हम उन महान वीरों को स्मरण करें और देश के प्रति समर्पण के भाव से कार्य करें।

 

रानी लक्ष्मीबाई की आज 185 वीं वर्षगांठ पर सुभद्रा कुमारी चौहान की यह पंक्तियां संपूर्ण भारतीय समाज को आज भी आंदोलित करती हैं। ” सिंहासन हिल उठे राजवंशों ने भृकुटी तानी थी/ बूढ़े भारत में भी आई फिर से नई जवानी थी/ गुमी हुई आज़ादी की कीमत सबने पहचानी थी/ दूर फिरंगी को करने की सबने मन में ठानी थी/ चमक उठी सन सत्तावन में वह तलवार पुरानी थी, बुंदेले हरबोलों के मुंह हमने सुनी कहानी थी/ खूब लड़ी मर्दानी वह तो झांसी वाली रानी थी। उक्त विचार किसान महाविद्यालय के डॉ. जे. बी. सिंह सभागार में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद द्वारा आयोजित की गई महारानी लक्ष्मी बाई की जयंती पर संगोष्ठी में अपने अध्यक्षीय भाषण में महाविद्यालय के प्रबंधक मेजर डॉ. एस.पी. सिंह ने व्यक्त किए। इस अवसर पर आई एम ए की अध्यक्ष डॉ. प्रज्ञा त्रिपाठी, एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. शिवम श्रीवास्तव और अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के नगर अध्यक्ष डॉ. धर्मेंद्र त्रिपाठी ने भी अपने विचार व्यक्त किए। इस आयोजन में बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं और अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के पदाधिकारी उपस्थित थे।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *