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हिन्दी काव्य संग्रह ‘पखेरू’ पिता पुत्री रिश्ता एक अनमोल धरोहर जिसे पढ़कर आपकी आंखे भी नम हो उठेगी

 

सुजानगंज जौनपुर । कवरेज इण्डिया

हिन्दी_साहित्य का एक अप्रतिम कारुणिक काव्य संग्रह है, इसमें एक पिता और एक पुत्री के लिए प्राणों की आहुति देकर एक दूसरे को सुरक्षित करने की अद्भुत कर्तव्यशीलता परिलक्षित होती है, कृपा शंकर मिश्र नारीपुर सुजानगंज की एक सड़क दुर्घटना में पुत्री प्रतीक्षा की मृत्यु हो जाती है,( उम्र अट्ठरह वर्ष ) पुत्री की परीक्षा चल रही है, संरक्षक पिता पुत्री को परीक्षा केन्द्र तक साथ जाने के लिए घर से प्रातः काल निकलते है, लेकिन एक ट्रक की चपेट में आने के कारण पिता पुत्री गंभीर हालत में जीवन का संघर्ष करते हैं, किन्तु पुत्री अपने पिता की रक्षा करते हुए मृत्यु का वरण करती है, पिता जिवित रह कर भी हार जाता है, पुत्री मरकर भी जीवंत हो उठती हैं…

 

इस सम्यक परिस्थिति को पखेरू को पुनः उडने के लिए प्रयत्नशील पिता पखेरू को उकेरता है, पुकारता है, उस अनन्त असीम आकाश के शून्य में, जहाँ उसे उसकी ही प्रतिध्वनि प्रतिभेदित करती रहती है ।वहीं पर राज्य सभा सांसद श्रीमती सीमा द्विवेदी को भेट करते हुए रो पड़े और सांसद श्रीमती सीमा द्विवेदी ने पिता पुत्री के रिश्ते को बताया पिता की एक अटूट हिस्सा होती है बेटी और हमारे समाज में आजकल बेटियाँ अपने आप में बहुत ही पराक्रम हासिल कर रही है आज कृपा शंकर मिश्र जैसे गुणवान पिता सभी बेटियों को मिले परंतु अहत. है आपके इस दुःखी मन को शांति के लिए आपके साथ हैं.

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